It takes time for the fist to let go. Skin remembers before the mind does.Half-moons buried in the palm,old negotiations between nail and flesh.So deep nowthe hand reads like an old map. And, something is opening. Not surrendering.Not noise. Nor the lack of itJust the exhaustion of holding. What had been “mine”had already started to... Continue Reading →
मेरा भी है
ये जो तुम्हारा “मैं” है नहाँ, यही वालामैं, मुझे, मेरा, मुझसेयही वाला हाँ, हाँसिर्फ तुम्हारा नहींमेरा भी हैसभी का है ये तो इतनी समानता तो शायददो जुड़वाँ बच्चों में भी नहीं होतीजितनी तेरे मेरे इस “मैं” में है इस “मैं” का जो मत है नबड़ा दृढ़ है इतना बल ख़याल में नहींइतनी रफ़्तार किसी याद... Continue Reading →
सादा गुलाबी
देखने भर की देर है, सब धुआँ छंट जाता है, सब स्पष्ट हो जाता है, सबसे अहम क्रिया है देखनामोहब्बत से पहले, ग्लानि से पहलेकल्पना से पहले, निष्कर्ष से पहलेख़याल से पहले, बयान से पहलेसबसे पहले है देखनादेखने भर की देर हैदेखना- जैसा है वैसागुलाबी को, नरम गुलाबी या शोख़ गुलाबी नहींसिर्फ सादा गुलाबी जैसा देखनाआँखों में... Continue Reading →
Of Doors & My Restless Stillness
Entering a dooris a conscious ceremony for me.Each time - I look.I linger.I remember.Some doors are ornate, some shy.Some barely holding on,like secrets taped together with time.But I never forget a door.They stay,etched in my mindlike scent in old fabric.Doors are my visual memory anchors.My maps of moments.I never walk through casually.My fingers know the... Continue Reading →
Parichay / परिचय
नमस्ते,मैं।किसी की बेटी, किसी की धर्मपत्नी, किसी की बहू।मैं किसी की माँ, किसी की बहन, और किसी की भाभी, मासी, चाची, ताई, बुआ।इन सभी रिश्तों में मुझे अपार खुशी मिलती है।पर क्या मैं सिर्फ यही हूँ?तीस की दहलीज़ पर कदम रखते ही यह सवाल मेरे मन में बार-बार गूंजने लगा।मुझे जीवन में कोई कमी नहीं... Continue Reading →
घर मेरा / ghar mera
कहाँ है घर मेरा?मेरा, मेरे बचपन में है क्या डेरा?चूल्हे की आँच में सेछनती माँ की छवि नेऔर कीकर पर उस पपीहे की पुकार नेमेरे मन की धरा में सब कुछ घेरावहाँ उस पल को घर कहते थे क्या?कहाँ है घर मेरा? स्कूल की उस पहली किताब की जिल्द में?या टिफ़िन से आती पराठे अचार... Continue Reading →
Darwaaze
दीवारों में दरवाज़े हों ना होंझरोखे दुरुस्त होने चाहिएतुम आ जा ना भी सकोहवायें, बौछारें, महक और संगीतआते जाते रहने चाहिएकिरणें, मौसम, चिट्ठी और नज़ारेआते जाते रहने चाहिए झरोखों में पर्दे हों ना होंनज़र भर बाहर झाँकने की गुंजाइश होनी चाहिएपर्दों पर फूल बनें हों ना होंवो हल्के, पारदर्शी होने चाहिएकी जब हवा चले तो... Continue Reading →
शून्य से ही सब बना है
क्या खूबसूरत समाँ हैबेहद ठंड और धुआँ हैना धूप है निकलीना सेक, ना रौशन जहाँ हैना वो अपना सा आलसना मेरे पास आता वो मीठे पानी का कुआँ हैना परिचित रास्ता, ना ठहाकेना ही पुकारता फ़लाँ फ़लाँ हैना साख गिरने का डर, ना जवाबदेहीना ऊँघता हुआ एक भी रुआँ हैलेटे हुए एकटक पंखे को घूरने... Continue Reading →
Amu’s Eyes
Amu was a rather curious child; or so his folks told. I met him when I was 38 and he was 27. He felt fresh like a breeze, uncomplicated, conveniently attached, mostly detached. I wish I could grow up with him, but I was already here - half my life gone, still figuring where I... Continue Reading →
ज़िंदगी आयी / life happened
आते आते धूप के किनारे से थोड़ी आँच के आयी थोड़ी रोशनी ले आयी थोड़ी शराफ़त और तड़का भर शरारत के आयी पेड़ की पत्तियों में छान छान किरणें ले आयी, नमी ले आयी, महक ले आयी प्रेम ले आयी, ना जाने कितने ही रंग के आयी मिट्टी में दौड़ते हुए, गोद में छुपते छुपाते... Continue Reading →
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