देखने भर की देर है, सब धुआँ छंट जाता है,
सब स्पष्ट हो जाता है,
सबसे अहम क्रिया है देखना
मोहब्बत से पहले, ग्लानि से पहले
कल्पना से पहले, निष्कर्ष से पहले
ख़याल से पहले, बयान से पहले
सबसे पहले है देखना
देखने भर की देर है
देखना- जैसा है वैसा
गुलाबी को, नरम गुलाबी या शोख़ गुलाबी नहीं
सिर्फ सादा गुलाबी जैसा देखना
आँखों में भरना
एक दशा को, दशा जैसा देखना
अच्छी, परम, बुरी, भयंकर दशा नहीं
सिर्फ एक दशा, जिसके तुम दर्शक हो
भोगी होना है या नहीं
उसका चयन कर सकते हो
अगर थोड़ा दूर होकर
अपनी दृष्टि को ठीक जमाकर
ज़रूरत पड़े तो आँखें छोटी कर
ध्यान केंद्र करके, सिर्फ देखना
दर्शक की हैसियत से
जितना दूर हो सके, उतने दूर के छज्जे से
पहली सीट में बैठकर, कहानी में डूबकर नहीं
वो मनोरंजन है,
सच भी हो, ये ज़रूरी नहीं
देखने भर की देर है
किरदारों की परतें हट जाती हैं
पूरा व्यापक दृष्टिकोण आता है
सब उजागर हो जाता है
सब स्पष्ट हो जाता है
प्रकाश आ जाता है
देखने भर की देर है

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