देखने भर की देर है, सब धुआँ छंट जाता है, सब स्पष्ट हो जाता है, सबसे अहम क्रिया है देखनामोहब्बत से पहले, ग्लानि से पहलेकल्पना से पहले, निष्कर्ष से पहलेख़याल से पहले, बयान से पहलेसबसे पहले है देखनादेखने भर की देर हैदेखना- जैसा है वैसागुलाबी को, नरम गुलाबी या शोख़ गुलाबी नहींसिर्फ सादा गुलाबी जैसा देखनाआँखों में... Continue Reading →
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