ये जो तुम्हारा “मैं” है नहाँ, यही वालामैं, मुझे, मेरा, मुझसेयही वाला हाँ, हाँसिर्फ तुम्हारा नहींमेरा भी हैसभी का है ये तो इतनी समानता तो शायददो जुड़वाँ बच्चों में भी नहीं होतीजितनी तेरे मेरे इस “मैं” में है इस “मैं” का जो मत है नबड़ा दृढ़ है इतना बल ख़याल में नहींइतनी रफ़्तार किसी याद... Continue Reading →
सादा गुलाबी
देखने भर की देर है, सब धुआँ छंट जाता है, सब स्पष्ट हो जाता है, सबसे अहम क्रिया है देखनामोहब्बत से पहले, ग्लानि से पहलेकल्पना से पहले, निष्कर्ष से पहलेख़याल से पहले, बयान से पहलेसबसे पहले है देखनादेखने भर की देर हैदेखना- जैसा है वैसागुलाबी को, नरम गुलाबी या शोख़ गुलाबी नहींसिर्फ सादा गुलाबी जैसा देखनाआँखों में... Continue Reading →
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