It gives you timed meetingsTakes away conversationsIt gives you kgs and poundsTakes away the personIt gives you hours,takes away lives Measurement ruins everythingIt gives you calories,takes away the foodIt gives you bank balance,And a resume,takes away fulfilmentIt gives you steps and pace,Takes away the joy of a run, a swim, a walk Photo by Sora... Continue Reading →
हम यूँही हैं
हर ताले के पीछे कुछ क़ीमती नहीं होता हर चुप के पीछे कुछ गहरायी नहीं होती हर अभाव में ख्वाहिश नहीं होती हर खामोशी में ग़म नहीं होता हर नींद में नशा नहीं होता हर कश में धुआँ नहीं होता हर मैं में स्वार्थ नहीं होता हर तू में इल्ज़ाम नहीं होता हर सिफ़र को भरना नहीं होता हर पल को भरपूर जीना नहीं होता हर बात का मायना नहीं होता बिन मक़सद भी होता है बहुत कुछ यूँही भी होता है बिन मंज़िल भी होता है बहुत कुछ अधूरा भी होता है
तेरे पहलू में
तेरे पहलू में, गहमा गहमि से परे शोर गुल से परे एक नर्म, सरल सा एहसास है परिवार से परे, दोस्तों से परे, सब से परे, खुद से परे, तुझसे भी परे, माँ के दामन जैसा महफ़ूज़ धरती के जैसा अपार तेरी मोहब्बत के जैसा मखमली तेरे पहलू में, एक नर्म, सरल सा एहसास है... Continue Reading →
मैं प्यार नहीं समझती
तुम कहते हो प्यार क्या है मैं नहीं समझतीशायद नहीं समझतीतुम जो कहते हो सही ही कहते होबस तुम्हारे पीछे पीछे चलती हूँतुम हँसते हो तो हंसती हूँजब रोते हो तो रो देती हूँतुम्हारी परछाई जैसीतुम तक पहुँचने की कोशिश करतीजैसे तैसे बस तुम्हारे दाएं बाएं इधर उधर मंडराती रहतीपर शायद प्यार मैं नहीं समझतीसही... Continue Reading →
कुछ अपना सा
कभी सोचा है वहाँ क्या है?वहाँ उस मोड़ परवो जो एक पेड़ों में ढका मकान हैहाँ वहीं जहां कभी नज़र नहीं रुकीकभी बस नहीं रुकी, कभी टैक्सी नहीं मिलीवहीं जहां से कभी कोई नहीं आता जाता दिखाअंदर कोई तो होगा मगरआज ठीक उसके सामने एक coffee shop में बैठी हूँकिसी का इंतेज़ार कर रही हूँ... Continue Reading →
Urdhvobhava(Rise High), But Why?
I know what I wanted and if I get a chance to live it again - I swear I would still pick being with you all over a boarding school.
मेरा, जुगनू जैसा
जुगनु जैसा टिम टिम जग मग काली गहरी लम्बी रातों को हल्की हल्की रोशनी देता जुगनू जैसा फर्र फर्र कभी इधर कभी उधर अथाह सियाह क्षितिज तक नरम मध्धम अंतराल जैसा जुगनू जैसा दौड़ते हुए दिनों पे पड़ती हुई रातों में ठहरो, थोड़ा आराम करलो रुको थोड़ा सांस भर लो ये कहता जुगनू जैसा टिम... Continue Reading →
कुछ दरवाज़े
कुछ दरवाज़े अंदर की ओर खुलते हैं उन्हें हाथ से अपनी तरफ खींचना पड़ता है खुद हट के उन्हें रास्ता देना पड़ता है आराम से निकलना पड़ता है नहीं तो गिरने का डर लगता है ये बाहर की दुनिया के लिए अंदर आने का न्यौता हैं पर अंदर वालों के लिए जैसे पिता की चौखट... Continue Reading →
मेरी रिमझिम
मैं छलकी तू बही मेरी तहों में तू रही मुझ में पूरी, खुद में अधूरी, मेरी बेखबर कस्तूरी सिमटी, गुर्राई, महकी, मेरी दुनिया महकाई जो किया - सब सही कभी तमक बरसाती, कभी मेहनत मेरी रिमझिम, बड़ी हठी थिरकती खनकती बिलखती फिर चेहेकती मेरी आँखें, मेरे शब्द मेरी सांझ, मेरी सखी मोह से, ताप से,... Continue Reading →
कल (आनेवाला )
मैंने जब हाँ कहा था, तुम मुझसे कद में छोटी थी, भोली थी, सुन्दर थी, चुप चुप सी थी। पूछने पर झट से हाँ कहा था खुद को आईने में देख के बड़ा इतराया था उस रोज़ मेरी बीवी मेरा घर जगमग करेगी ब्याह के जब तुम्हें लाया तब ख़याल आया कि अपने घर को... Continue Reading →
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