तेरे पहलू में,
गहमा गहमि से परे
शोर गुल से परे
एक नर्म, सरल सा एहसास है
परिवार से परे, दोस्तों से परे,
सब से परे, खुद से परे,
तुझसे भी परे,
माँ के दामन जैसा महफ़ूज़
धरती के जैसा अपार
तेरी मोहब्बत के जैसा मखमली
तेरे पहलू में,
एक नर्म, सरल सा एहसास है
ना कोई दर्द, ना मर्म, ना अनकहा कुछ
ना जिज्ञासा, ना दिलासा, और कुछ भी असत्य
जीवन से परे, जीवन की जद्दोजहद के परे
उलझन के परे, संघर्ष भरी सुलझन के भी परे
एक चुप से अंत के जैसा सुकून है
हर दिन ना सही, अंत तो सबका ऐसा ही हो तो अच्छा है
मुझे तेरे पहलू में ही रहना है
कौन जाने कब अंत आ जाए
Awesome
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