जुगनु जैसा
टिम टिम जग मग
काली गहरी लम्बी रातों को
हल्की हल्की रोशनी देता
जुगनू जैसा
फर्र फर्र कभी इधर कभी उधर
अथाह सियाह क्षितिज तक
नरम मध्धम अंतराल जैसा
जुगनू जैसा
दौड़ते हुए दिनों पे पड़ती हुई रातों में
ठहरो, थोड़ा आराम करलो
रुको थोड़ा सांस भर लो
ये कहता
जुगनू जैसा
टिम टिम जग मग
सन्नाटे में सुरीली सरगम जैसा
अंतहीन निराशा में
छोटी सी मुस्कुराहट से आशा पिरोता
जुगनू जैसा
धरती पे जीवन का एक अंश मात्र
अपने वजूद का सारा प्रकाश
हर सांस में जलाता
जलता हुआ भी शीतल सा
जुगनू जैसा
सूरज से भी पहले
चाँद के बाद
दिन की पहली किरणें बन के
अगली शाम तक
हर रौशन दिन में घुलता, विलीन होता, मिटता
फिर पूरा दम भर
अपने पंखों में जीवन फूँक
फिर से टिम टिम, जग मग, फर्र फर्र
कभी इधर कभी उधर
काली गहरी लम्बी रातों को
हल्की हल्की रोशनी देता
मेरे जीवन का अंषुमन, मेरी सुबहों में जान भरता
जुगनू जैसा
छोटा सा पर अनंत
मेरा
जुगनू जैसा
बेहद खूबसूरत 😊😊🤗🤗
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Wow जुगनू 🥸जैसा
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