कल (आनेवाला )

मैंने जब हाँ कहा था,
तुम मुझसे कद में छोटी थी,
भोली थी, सुन्दर थी,
चुप चुप सी थी।

पूछने पर झट से हाँ कहा था
खुद को आईने में देख के बड़ा इतराया था उस रोज़
मेरी बीवी मेरा घर जगमग करेगी

ब्याह के जब तुम्हें लाया तब ख़याल आया
कि अपने घर को थोड़ा और सजाना चाहिए था –
ये चार दीवारें, एक छोटा सा कमरा, छोटी सी रसोई, पुराना गुसलखाना
तुमसे मेल नहीं खाता अभी

मन में तब ठाना था कि एक दिन सुन्दर सा गुलाबी घर बनाऊंगा
बिलकुल अपनी सुन्दर बीवी जैसा
फिर बच्चे आये, हम बड़े शहर गए,
नयी दुनिया देखी, भोगी,
ज़माना बदला, मैं बदला, तुम बदली,

बीच में कहीं मैंने रुक कर तुम्हें देखा
तुम अब मुझसे कद में ऊँची थी,
भोली थी, सुन्दर थी,
थोड़ा थोड़ा बोलने लगी थी

फिर मैंने अपने सपनों का गुलाबी घर बनाया
तुम्हारी पसंद से सजाया
बच्चों को पढ़ाया, थोड़ा खर्चा, थोड़ा बचाया
कभी जुदाई आयी, कभी मजबूरी
तिनका तिनका कर ज़िन्दगी बनाते गए
थोड़ा डर के, थोड़ी हिम्मत से
हम कल बनाते गए

आज मैं जब देखता हूँ
तो बच्चे भी मुझसे लम्बे हैं
तुम अब भी भोली हो, सुन्दर हो
काफी ज़्यादा बोलने भी लगी हो
45 सालों में बहुत कुछ बदला
मेरे सारे बाल सफ़ेद हैं
और तुम्हारे मेहँदी में रंगे
गुलाबी सूट तुमपे अब भी जचते हैं
और मैं आज भी उतना ही डरता हूँ – या यूँ कहो तुमसे मोहब्बत करता हूँ
बड़ा रंगीन टीवी या दुनिया कि सैर क्या – तुम ने जब जो चाहा है – मैंने दिया है – कम से कम कोशिश पूरी कि है
हेलो जी – क्या बाकी और ज़िन्दगी तुम्हें भी उतनी ही साफ़ और संदर दिखती है जितनी मुझे?

सुनो जी
जब मेरी शादी हुई मुझसे किसी ने पूछा नहीं – बस बताया था
और मैंने आपको आँख भर शादी से पहले देखा भी नहीं था
बस इतना सुना था – एक बड़े अफसर हैं

देख तो जाना था
आप तब मुझसे कद में ऊँचे थे
मूंछे आप पर खूब फब्ती थीं
मीठे के शौक़ीन इतने,
कि मैंने सुना था आप चीनी जेब में रखते थे

मैंने आपकी पसंद का खाना बनाना सीखा
आपके पूरे परिवार के साथ ख़ुशी से जीना सीखा
जितना मिले उसमें संतोष करना सीखा

फिर हम बड़े शहर गए,
ज़माना बदला, बच्चे बड़े हुए
नौकरी कि ज़िम्मेदारी देखी
बच्चों कि ज़िद और आपका गुस्सा देखा

आपका गुस्सा समझ पायी
क्यूंकि मैंने आपका ईमान समझा,
आपके नज़रिये को जाना, आपकी मेहनत को देखा
और दिन प्रतिदिन आपकी जीत को देखा
पिछले दिन के खुद से आप अगले दिन जीत जाया करते थे

बीच में रुक कर मैंने जब फिर आपको ध्यान से देखा
आप तब मुझसे कद में छोटे थे
बाल कुछ झरने लगे थे, आपकी चाल में गुरूर था
मीठे के शौक़ीन इतने,
कि मैंने देखा था आप बर्फी के साथ रोटी खा लेते थे

फिर हमने अपना सपनों का गुलाबी घर बनाया
साथ में सजाया, बच्चों को पढ़ाया,
थोड़ा खर्चा, थोड़ा बचाया
कभी जुदाई आयी, कभी मजबूरी
तिनका तिनका कर ज़िन्दगी बनाते गए
थोड़ा डर के, थोड़ी हिम्मत से
हम कल बनाते गए

आज मैं जब देखती हूँ
आप अब भी उतनी ही मेहनत करते हो,
उतना ही डरते हो,
बहुत गाते हो – और ऊँचा ऊँचा हँसते हो
45 सालों में बहुत कुछ बदला
मूछें रख लीजिये – अब भी खूब जचेंगी
थोड़ा कम डरा कीजिये – अब सब ठीक है
रंगीन टीवी तो ठीक है – पर एक गुलाबी सूट ज़रा और दिलवा दो
सुनो जी – मेरे लिए तो ज़िन्दगी ही आप हैं – बाकी ज़िन्दगी तो पिछली से भी ज़्यादा सुन्दर दिखती है – क्यूंकि अब आप सिर्फ मेरे साथ हैं।

2 thoughts on “कल (आनेवाला )

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  1. शायद यही सच्चा प्रेम है। जब एक दूसरे की पसंद अपनी पसंद नापसंद बं जाए तो प्रेम की पराकाष्ठा बन जाती है। बहुत सुंदर उदगार ।

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