"फिर कभी..", ज़िन्दगी ने कहा, "तुमसे, मैं फिर कभी मिलूंगी देखना तब तक गुज़र हो पाए बस, वादा नहीं है - वादा तुम समझ नहीं पाओगे, वादा मैं रख भी नहीं पाऊँगी, यूँ ही बस लड़ने का बहाना बनेगा - वादा सिर्फ कोशिश करेंगे - मैं वापस आने की.. तुम यहीं रहने की मुश्किल होगी.. पता है मुझे देखा है मैंने अच्छे-अच्छों को हारते हुए मेरे बिना वजूद ढूंढ़ना पड़ता है... मिलता नहीं जैसे रेत में रास्ता - सागर में आंसू बारिश में पसीना - अँधेरे में दरवाज़ा मिलता नहीं.. वजूद भी नहीं मिलेगा पर चलो.. तुम अपना किस्सा लिखना नयी मिसाल की कोशिश करना, जान बिना जीवन जीने की कोशिश करना जी पाए, तब फिर मिलेंगे", ज़िन्दगी ने कहा...

बहुत सुंदर। वाह।
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Khoobsurat
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सच्चाई से रुबरू 👌👌🙏🙏😊
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shukriya
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बहुत ही बढ़िया 👌
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Do nadiyan milti he ghulti he phir bichhad jati he, sath me le jati he ek duje ka pani, bas phir kabhi nhi milti, shivaye sagar ke.
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waah – kya khoob likha hai aapne bhi.
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