हर काल में है काले का किरदार
हर सुबह पर शाम का है अधिकार
जुबां से जुबां तक चलती महाभारत में
काले हाथी की हुंकार तक
सांवल कृष्ण के आकार तक
हारे हुए शवों पर स्याह काग की पुकार तक
और फिर अनंत बद्र की बौछार से
ठंडी हुई राख तक
हर काल में है काले का किरदार
निरंतर कलम की स्याही से निकलती
इस कविता से उस कथा तक
हर सुबह पर शाम का है अधिकार
हर मरण पर प्रारम्भ जीवन में
काया के दहन में, दफ़न में ,
राख में, ख़ाक में
है नयी कोंपल का ऐश्वर्य
कल बीत गया तो आज है अदम्य
काले कागज़ पे ही है श्वेत लकीर का सौंदर्य
हर काल में है काले का किरदार
हर सुबह पर शाम का है अधिकार
Nice
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Very nice . You have picked up some urdu words also in your poetry.
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