मैं प्यार नहीं समझती

तुम कहते हो प्यार क्या है मैं नहीं समझतीशायद नहीं समझतीतुम जो कहते हो सही ही कहते होबस तुम्हारे पीछे पीछे चलती हूँतुम हँसते हो तो हंसती हूँजब रोते हो तो रो देती हूँतुम्हारी परछाई जैसीतुम तक पहुँचने की कोशिश करतीजैसे तैसे बस तुम्हारे दाएं बाएं इधर उधर मंडराती रहतीपर शायद प्यार मैं नहीं समझतीसही... Continue Reading →

कुछ अपना सा

कभी सोचा है वहाँ क्या है?वहाँ उस मोड़ परवो जो एक पेड़ों में ढका मकान हैहाँ वहीं जहां कभी नज़र नहीं रुकीकभी बस नहीं रुकी, कभी टैक्सी नहीं मिलीवहीं जहां से कभी कोई नहीं आता जाता दिखाअंदर कोई तो होगा मगरआज ठीक उसके सामने एक coffee shop में बैठी हूँकिसी का इंतेज़ार कर रही हूँ... Continue Reading →

मेरा, जुगनू जैसा

जुगनु जैसा टिम टिम जग मग काली गहरी लम्बी रातों को हल्की हल्की रोशनी देता जुगनू जैसा फर्र फर्र कभी इधर कभी उधर अथाह सियाह क्षितिज तक नरम मध्धम अंतराल जैसा जुगनू जैसा दौड़ते हुए दिनों पे पड़ती हुई रातों में ठहरो, थोड़ा आराम करलो रुको थोड़ा सांस भर लो ये कहता जुगनू जैसा टिम... Continue Reading →

कुछ दरवाज़े

कुछ दरवाज़े अंदर की ओर खुलते हैं उन्हें हाथ से अपनी तरफ खींचना पड़ता है खुद हट के उन्हें रास्ता देना पड़ता है आराम से निकलना पड़ता है नहीं तो गिरने का डर लगता है ये बाहर की दुनिया के लिए अंदर आने का न्यौता हैं पर अंदर वालों के लिए जैसे पिता की चौखट... Continue Reading →

मेरी रिमझिम

मैं छलकी तू बही मेरी तहों में तू रही मुझ में पूरी, खुद में अधूरी, मेरी बेखबर कस्तूरी सिमटी, गुर्राई, महकी, मेरी दुनिया महकाई जो किया - सब सही कभी तमक बरसाती, कभी मेहनत मेरी रिमझिम, बड़ी हठी थिरकती खनकती बिलखती फिर चेहेकती मेरी आँखें, मेरे शब्द मेरी सांझ, मेरी सखी मोह से, ताप से,... Continue Reading →

कल (आनेवाला )

मैंने जब हाँ कहा था, तुम मुझसे कद में छोटी थी, भोली थी, सुन्दर थी, चुप चुप सी थी। पूछने पर झट से हाँ कहा था खुद को आईने में देख के बड़ा इतराया था उस रोज़ मेरी बीवी मेरा घर जगमग करेगी ब्याह के जब तुम्हें लाया तब ख़याल आया कि अपने घर को... Continue Reading →

चंद सिक्के | Chand Sikke

चंद सिक्के चंद सिक्कों को गिन गिन खनकते चमकते, आज मेरे कल शायद तेरे पुराने नए छोटे बड़े सब सिक्कों को फिर से गिन एक पुराने बटुए की उधड़ी जेब में संभाल कर, मैं हर सुबह घर से निकलता बाल संवार, चेहरा निखार थोड़ी शरारत से माँ को हंसा कर खिलखिलाहट घर में फैला कर... Continue Reading →

“फिर कभी..”

"फिर कभी..", ज़िन्दगी ने कहा, "तुमसे, मैं फिर कभी मिलूंगी देखना तब तक गुज़र हो पाए बस, वादा नहीं है - वादा तुम समझ नहीं पाओगे, वादा मैं रख भी नहीं पाऊँगी, यूँ ही बस लड़ने का बहाना बनेगा - वादा सिर्फ कोशिश करेंगे - मैं वापस आने की.. तुम यहीं रहने की मुश्किल होगी..... Continue Reading →

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