कहाँ है घर मेरा?
मेरा, मेरे बचपन में है क्या डेरा?
चूल्हे की आँच में से
छनती माँ की छवि ने
और कीकर पर उस पपीहे की पुकार ने
मेरे मन की धरा में सब कुछ घेरा
वहाँ उस पल को घर कहते थे क्या?
कहाँ है घर मेरा?
स्कूल की उस पहली किताब की जिल्द में?
या टिफ़िन से आती पराठे अचार की महक की याद में?
यहाँ था क्या वो घर मेरा?
पापा की दफ़्तर की कुर्सी और वहाँ मिलते fruit cake में?
या उन ‘फिर गई light’ के सवालों तक ही था सब मेरा?
दादी के झूलों में, ऊँची ऊँची पींघों में?
बाजरे की खिचड़ी में, रामायण वाले रविवार में
शाम की अज़ान और भजन में?
‘ईश्वर अल्लाह तेरो नाम’ और साथ आती धूप की महक में?
किस दिशा में था वो घर मेरा
घर मेरा
राह बुझे तो बताना
वहाँ की सड़क थोड़ी थी और थोड़ी नहीं थी
पते में सिर्फ़ s/o d/o और गाँव का नाम लिख देने से
चिट्ठी, टेलीग्राम, मेहमान, बरात सब पहुँच जाते थे
और वो भी था शायद, दिल्ली वाला।
वहाँ तो रिक्शा दरवाज़े तक छोड़ने आती थी
मेरी बहनें सुबह तैयार होकर, हाथ में वही पराठे अचार का roll लेकर स्कूल जाती थी
काफ़ी मस्ती करती थी वो। साथ ही रहती थी हमेशा, स्कूल में, घर में, दोस्तों में, परिवार में
मुझे ख़ास कुछ पता नहीं, मैं वहाँ थी नहीं
तो क्या वो घर था मेरा?
मैं तो hostel में थी
अपने कपड़े समेटना, अपने बाल बनाना, ख़ुद सो जाना,
सुबह ख़ुद से उठना
अपने जूते polish करना
चिट्ठी लिखना, diary लिखना, चुप रहना,
सब ठीक से सीख गई थी मैं
थोड़ी थोड़ी भोली भोली शरारत भी सीख गई थी
वहाँ दोस्त थे मेरे, ढेर सारी सराहनाएँ और कुछ teachers की मार भी थी
स्वावलंबी बनने का यही तरीक़ा था शायद
पर वो घर नहीं था मेरा
छोटे heartbreaks, बहुत सारी प्रेम कहानियों का घर था वो
मेरा नहीं था
फिर college के हॉस्टल में था क्या?
परिवार जैसे दोस्त भी थे वहाँ तो।
तैयारी थी वहाँ आने वाले कल की
कभी बहुत serious और कभी बहुत मस्ती थी वहाँ
पहला सफ़ेद बाल दिखा था अपने सर में वहाँ
stress थोड़ा थोड़ा समझ आने लगा था
हिम्मत सीखी, कुछ घुटन वाले बंधन तोड़े
और नये अपनी पसंद के रिश्ते जोड़े थे
घर सा था पर घर नहीं था
दो दशक, पंद्रह किलो भार, सैकडों सफ़ेद बाल,
थोड़े बैंक बैलेंस, हज़ारों खूबसूरत पल
और कुछ मुश्किल से घटते पलों में वृद्धि के बाद,
आज घर कहाँ है मेरा?
मेरी देवी के नन्हे हाथों के जोड़े में, उसके भविष्य में?
या जीवनसाथी के साथ दूर तक चलने के वादे में
साथ सुने सुकून भरे संगीत में
अगले holiday की planning में, या पिछली छुट्टी की album में?
दफ़्तर में, रसोई में, बगीचे में, दांतों की सफ़ाई में
हर जगह इसी सवाल ने मुझे घेरा
घर कहाँ है मेरा?
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