हर ताले के पीछे कुछ क़ीमती नहीं होता
हर चुप के पीछे कुछ गहरायी नहीं होती
हर अभाव में ख्वाहिश नहीं होती
हर खामोशी में ग़म नहीं होता
हर नींद में नशा नहीं होता
हर कश में धुआँ नहीं होता
हर मैं में स्वार्थ नहीं होता
हर तू में इल्ज़ाम नहीं होता
हर सिफ़र को भरना नहीं होता
हर पल को भरपूर जीना नहीं होता
हर बात का मायना नहीं होता
बिन मक़सद भी होता है
बहुत कुछ यूँही भी होता है
बिन मंज़िल भी होता है
बहुत कुछ अधूरा भी होता है
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