उसने पूछा फूल चाहिए? मैंने गुलाब मांग लिया
उसने पूछा खुशबु? मैंने चन्दन को छू दिया
उसने उगता सूरज दिखाया मैंने पर्दा कर दिया
ढलता चाँद दिखाया मैंने आँखों को मूँद लिया
उसने पूछा साथी चाहिए? मैंने अपना बोझ थमा दिया
ख़ुशी चाहिए? मैंने कहा तुम रहने दो – नहीं दे पाओगे
ज़िद्दी था बोला मांगो तो सही – मैंने कहा चलो अपनी ख़ुशी देदो
मुस्कुरा कर बोलै – बस इतनी सी चाह? ये लो!
और सुनो, मेरे साथ चलोगी? मैंने अपनी शर्तें थमा दी
आगे की कहानी कुछ यूँ निकली – हम साथ चले,
वो आगे देख का उत्साह दिखता रहा मैं पीछे देख कर आह
वो आनंद ढूंढ़ता रहा मैं राह
वो निर्मल पवित्र, मैं स्याह
उसने पूछा मेरे लिए रुकोगी?
थोड़ा थक गया हूँ, तुम रास्ता आँकोगी?
मैंने उदास चेहरा बना दिया
वो बोला रहने दो – देखो सामने कितना सुन्दर दरिया
मैं वहीँ अटकी रही और बोली
तुम बदल गए
तुमने वादा किया था कभी न थकने का – आज कैसे रुक गए
वो मुस्कुराया और बोला – अच्छा चलो जाने दो
मैं गलत था पर देखो – ये लम्हा न बीत जाये
उस लम्हे में उसने सारे अच्छे नज़ारे दिखाए – गिनाये
चिड़िया आयी पानी पिया, बदल आये – कुछ बरसे कुछ गरजे
पहले ढलता सूरज दिखा – और फिर दूर गगन में चाँद
मैं लेकिन वहीँ रोती रही – मेरे साथ गलत हुआ है सोचती रही
आज ये थका है कल रुकेगा!
इसका तो जो हो सो हो, अब मेरा क्या होगा?
मैं इसी सोच बीन में लगी रही
वो शायद थोड़ा हंसा थोड़ा रोया – थोड़ा गिरा थोड़ा बढ़ा
थोड़ा रूठा – थोड़ा मनाया और फिर चल पड़ा
चाहते हुए भी सूरज से नज़र नहीं हटा पाया प्रवाह के साथ बह चला
फिर रुका, पीछे मुड़ा
बोला सुनो, तुम्हे और क्या चाहिए?
मैंने कहा जो तुम्हारा वो सब देदो
बोला – चलो ये भी लेलो
मैं लेती रही – वो देता रहा
फिर एक दिन वो खाली हो गया
बोला साँसें बची हैं – ये भी लेलो
मैं फिर रो दी – तुम क्या मुझपे एहसान कर रहे हो?
अपने लिए आराम की नींद के लालच में मेरे सर इलज़ाम कर रहे हो?
तुम्हने पूछा फूल चाहिए? तो क्या हुआ अगर मैंने गुलाब ले लिया?
तुमने पूछा खुशबु? क्या हो गया अगर मैंने चन्दन को छू दिया?

खूबसूरत कविता।👌👌
फिर एक दिन वो खाली हो गया
बोला साँसें बची हैं – ये भी लेलो
LikeLiked by 1 person
Very deep….
LikeLiked by 1 person