तुम देखना सपने नए
मैं सहेजूँगी यादें पुरानी
तुम उड़ के देखो उड़ान कहाँ तक
मैं देखूंगी गहराई कितनी
तुम समेटना भीतर सब कुछ
मैं संभाल लुंगी बाहर की कहानी
तुम बांचना सफर के पड़ाव
मैं बताती रहूंगी राहें कमानी
ज़िन्दगी थोड़ी तुम जीना बाकी मैं पी लुंगी
थोड़ी तुम गुनगुनाना बाकी मैं गा लुंगी
कभी तुम बनाना मैं बिगाड़ दूंगी कभी तुम्हारी बिगाड़ी संवार लूंगी
तुम जोड़ते रहना अपना हिस्सा
हमेशा बेहिसाब देना गिना चुना लेना
तुम्हारे हिस्से से बनेगा मेरा किस्सा
तुम संगीत का ध्यान रखना
मैं खिड़कियाँ खोल दूंगी
बना ही लेंगे हर शाम सुहानी
बुढ़ापे में सुनाएंगे एक दूसरे को
धुंधली आँखों से नज़र उस तस्वीर पे टिकाये
लड़खड़ाते लबों की ज़ुबानी
तुम्हारे हिस्से की मेरी कहानी

Waah! bahut sundar likha he. No wonder love is being together and complete each other. Accept each other completely.
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बेटा,अच्छा किया जो अपनी रचनाओं को सोशल मीडिया पर डाला। देखा कैसी कैसी टिप्पणियां मिलती है। अपने दरवाजे पूरे खोल दो और देखो लोग कितना पसंद करते हैं। बहुत बहुत अच्छे।
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Thank you. I’m glad you liked this.
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It’s heart touching and speechless……
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