ये सब मेरी माँ ने बनाया है
ये सुबह, ये रात,
इंद्रधनुष के ये रंग सात
सूरज की सभी किरणे
मोर के नाच में निशात
ये सब मुझे मेरी माँ ने सिखाया है
कर्म है सबसे बड़ा जाप
चलते रहो निरंतर कर्मठ चुपचाप
सेवा में है प्रेम, प्रेम में सेवा
मुस्कराहट में है प्रताप
ये सब मुझे मेरी माँ ने दिखाया है
रंगों का मूल
पौधे की जड़
फल की मिठास
अम्बर का माप
मैंने माँगा या मात्र चाहा
मेरी माँ ने दिया है या दिखाई राह
बिन थके बिन रुके
मेरी माँ – हठी अजर
ये सब मेरी माँ ने बनाया है
मेरा बचपन मेरी जीवन
मेरी सोच मेरा चितवन
मेरी आँखें
मैं
और मेरा परोक्ष ज्ञान
मेरी शिक्षक, मेरी रक्षक
मेरी जननी, जीवन दायिनी
मेरी माँ पे निसार
मेरा वजूद मेरी ज़ात
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