तुम मुझे नाम से पुकारते थे
बर्फीले ठन्डे झौन्कों के साथ
कुछ गर्म रेत के फव्वारे भी आते थे
जैसे सर्द रेगिस्तान पे ओलों के बवंडर चले हों
नज़ारा नया था, अनदेखे में देखा सा
जाते हुए तुमने आसुओं के साथ
कुछ खिलखिलाती हंसी भी पीछे छोड़ी थी
जैसे वापसी के लिए इज़ाफ़ी चाबी साथ राखी हो
अभी पीछे वही अनकही अनबन, वही मेरे तरीके, तेरे सलीके थे
जैसे गुदगुदी में हंसी का गाला भर आया हो
अहसास पुराना था, थकान सी थी
तुम मुझे किस नाम से बुलाते थे?
जैसे जून के महीने में धूप के साथ बरसात ने भी गुहार लगायी हो
तुमने छूते ही हाथ और मैंने नज़रें फेर ली हों
मेरा अभिमान तेरा अहंकार, हम ये कहाँ ले जायेंगे?
कौन जीत कौन हारा, इन ज़्यादा खट्टी कम मीठी यादों का बोझ कब तक उठाएंगे?
पुराने कल के साथ पुराने प्रेम को भी पूर्ण होना था
फिर नहीं मिलेंगे कह कर तुम आगे बढ़ गए
अपना दर्द ज़्यादा मान कर मैंने कल के दरवाज़े बंद कर लिए
तुम्हे भी वहीँ पीछे कहीं छोड़ दिया
नए आंसुओं ने पुराने रस्ते पर बेहना सीख लिया
सालों बीते, मेरे सुन्न कदम आगे बढ़ते गए
नज़ारा नया था, अनदेखे में देखा सा
आज फिर मई की गर्मी में बौछार की बात छिड़ी
कुछ गरम रेत के फव्वारों के साथ
बर्फीले ठन्डे झोंके भी आये थे
बेगानी आँखों ने बादलों से दोस्ती कर ली थी
पुकार सुनते ही खुद भी बरसने लगी
बेगाने कदम चलने लगे, किसी को ढूंढते, पीछा करते
बाहर खुले आसमान के नीचे जाके रुके तो देखा एक अपनी सी मुरकुराहट ने बुलाया था
तुम मुझे किस नाम से बुलाते थे?
वो तुम थे, तुम रही तो थे
मुझमे थे, खुद में थे, हर मुस्कुराते चेहरे में थे
आज तो बस अपने क़दमों पर आये थे
तुमने कुछ कहा ही नहीं या मैंने कुछ सुना नहीं?
साथ चलते हैं. इस बार खट्टा कम, मीठा ज़्यादा बनाते हैं
फिर परिचय करते हैं
मुझे आशना कहते हैं
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