बरफीले ठन्डे झोंकों के साथ कुछ गरम रेत के फव्वारे भी आये थे
जैसे सर्द पर्वतों पर रेगिस्तान के बवंडर चले हों
नज़ारा नया था, अनदेखे में देखा सा
अनजानी हवा में जानी पहचानी चढ़ती चांदनी का
एक वादा जिसका होना ही काफी था
एक ख्याल जो बरसात में भी धुप की किरणों जैसा जगमग था
छिली हथेलियों में मखमली उँगलियाँ कभी छूटने की चाह में और लिपटती थीं
बेचैन अग्नि सांस मांगती फिर जल के रात करती थी
मेरी बात ज़बान छोड़कर दुसरे दिल तक प्रेम बनके पहुँचती थी
इतना ज़ाहिर, इतस रौशन कल था मेरा.
आज आसमान सलेटी है, सर पे काले कीकर की छत है
झिलमिल बूँदें शीशे पे फिसलती अपने रस्ते बनाती, डगमगाती, झहूमति, रूकती चलती सारी धूल नीचे ले जाती है
दीवानगी में नाचते मोर देखने के लिए काँटों की बरसाती भी सही लगती है
दूर की धुंधलाहट ने नज़दीकियां स्पष्ट कर दी हैं
कोई बेचैनी कोई छटपटाहट नहीं है; काले को सफ़ेद की मिलावट लाज़मी नहीं है
अधूरी बात भी आँखें छोड़कर दुसरे दिल तक प्रेम बनके पहुँचती है
आज कल से बेहतर है मेरा

अधूरी बात भी आँखें छोड़कर दुसरे दिल तक प्रेम बनके पहुँचती है
आज कल से बेहतर है मेरा
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