तेरे पहलू में, गहमा गहमि से परे शोर गुल से परे एक नर्म, सरल सा एहसास है परिवार से परे, दोस्तों से परे, सब से परे, खुद से परे, तुझसे भी परे, माँ के दामन जैसा महफ़ूज़ धरती के जैसा अपार तेरी मोहब्बत के जैसा मखमली तेरे पहलू में, एक नर्म, सरल सा एहसास है... Continue Reading →
पुरानी डायरी
मैं लिखने बैठती हूँ जब भी पुरानी एक डायरी है जो दिखती है सबसे ऊपर हर बार एक एक पन्ना पलट कर आखरी खाली वाले तक जाती हूँ हमेशा पुराने में से ही नए शब्द खोजती हूँ, यूँ होती है हर शाम बसर कुछ ऐसा लिखा था नाम तेरा पहले पन्ने पर, पीछे की जिल्द... Continue Reading →
हाँ कहते जो तुम…
तेरा कल आगया, मेरा कल अभी गुज़रा ही नहीं मैं उसी लम्हे को जीती हूँ बार बार क्या प्यार? किसकी पुकार? क्या बरकरार? सब बेकार! मेरे दिन हैं अधूरे रातें बेज़ार क्या अलग होता कुछ - हाँ कहते जो तुम, न करते इंकार?
मेरे पिता के हाथ
जीवन तराशते, प्रकाश तलाशते मेरा जीवन बनाते कल से बेहतर आज, आज से बेहतर कल मेरे पिता के हाथ कभी करुणा से आखों की नमी पोंछते कभी झूठी नाराज़गी जताके लगाम खींचते बेरोक प्रेरक शक्ति बन कुछ लिखते जाते कभी खर्चे का हिसाब, कभी कल के ख्वाब मेरे पिता के हाथ द्रढ़ थे हर कदम,... Continue Reading →
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