जीवन तराशते, प्रकाश तलाशते मेरा जीवन बनाते कल से बेहतर आज, आज से बेहतर कल मेरे पिता के हाथ कभी करुणा से आखों की नमी पोंछते कभी झूठी नाराज़गी जताके लगाम खींचते बेरोक प्रेरक शक्ति बन कुछ लिखते जाते कभी खर्चे का हिसाब, कभी कल के ख्वाब मेरे पिता के हाथ द्रढ़ थे हर कदम,... Continue Reading →
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