घर लौटते हुए आज गर्मी बहुत थी शाम के 7:30 बजे भी आग बरस रही थी मैंने कार का AC बढ़ा दिया और पसीने पोंछते हुए दुनिया कोसने लगी कितनी कारें, कितने कम पेड़, सलेटी आसमान, कोई तारा नहीं बिन चमक का चाँद, जैसे कोई गोला बनाके उसमे रंग भरना भूल गया हो क्यों रहते... Continue Reading →
आधा तेरा आधा मेरा
उसने पूछा फूल चाहिए? मैंने गुलाब मांग लिया उसने पूछा खुशबु? मैंने चन्दन को छू दिया उसने उगता सूरज दिखाया मैंने पर्दा कर दिया ढलता चाँद दिखाया मैंने आँखों को मूँद लिया उसने पूछा साथी चाहिए? मैंने अपना बोझ थमा दिया ख़ुशी चाहिए? मैंने कहा तुम रहने दो - नहीं दे पाओगे ज़िद्दी था बोला... Continue Reading →
काले का किरदार
हर काल में है काले का किरदार हर सुबह पर शाम का है अधिकार जुबां से जुबां तक चलती महाभारत में काले हाथी की हुंकार तक सांवल कृष्ण के आकार तक हारे हुए शवों पर स्याह काग की पुकार तक और फिर अनंत बद्र की बौछार से ठंडी हुई राख तक हर काल में है... Continue Reading →
जड़ सी जमी
आंसूं में व्यर्थ क्यों करूँ, जब हर जान पानी मांगती फिर बढ़ूंगी फिर फलूंगी जब तक मेरी जड़ है मैं नहीं मरूंगी वृक्ष नहीं वृक्षा कहते हैं मुझे कभी छाँव सुहावनी, कभी चिता की अग्नि बनी मैं जड़ सी जमी
पुरानी डायरी
मैं लिखने बैठती हूँ जब भी पुरानी एक डायरी है जो दिखती है सबसे ऊपर हर बार एक एक पन्ना पलट कर आखरी खाली वाले तक जाती हूँ हमेशा पुराने में से ही नए शब्द खोजती हूँ, यूँ होती है हर शाम बसर कुछ ऐसा लिखा था नाम तेरा पहले पन्ने पर, पीछे की जिल्द... Continue Reading →
मेरे पिता के हाथ
जीवन तराशते, प्रकाश तलाशते मेरा जीवन बनाते कल से बेहतर आज, आज से बेहतर कल मेरे पिता के हाथ कभी करुणा से आखों की नमी पोंछते कभी झूठी नाराज़गी जताके लगाम खींचते बेरोक प्रेरक शक्ति बन कुछ लिखते जाते कभी खर्चे का हिसाब, कभी कल के ख्वाब मेरे पिता के हाथ द्रढ़ थे हर कदम,... Continue Reading →
तुम्हारे हिस्से की मेरी कहानी
तुम देखना सपने नए मैं सहेजूँगी यादें पुरानी तुम उड़ के देखो उड़ान कहाँ तक मैं देखूंगी गहराई कितनी तुम समेटना भीतर सब कुछ मैं संभाल लुंगी बाहर की कहानी तुम बांचना सफर के पड़ाव मैं बताती रहूंगी राहें कमानी ज़िन्दगी थोड़ी तुम जीना बाकी मैं पी लुंगी थोड़ी तुम गुनगुनाना बाकी मैं गा लुंगी... Continue Reading →
ये सब मेरी माँ ने बनाया है
ये सब मेरी माँ ने बनाया है ये सुबह, ये रात, इंद्रधनुष के ये रंग सात सूरज की सभी किरणे मोर के नाच में निशात ये सब मुझे मेरी माँ ने सिखाया है कर्म है सबसे बड़ा जाप चलते रहो निरंतर कर्मठ चुपचाप सेवा में है प्रेम, प्रेम में सेवा मुस्कराहट में है प्रताप ये... Continue Reading →
अब हुई है शाम
अब हुई है शाम क्या हम थे वहां या सिर्फ सपना ही था, कुछ पर्दे थे, कुछ हुआ खुले आम। क्या तेरी कही क्या मेरी सुनी, शब्द ही तो थे, हुई अपनी ही ज़ुबाँ बेईमान। सब बिखर गया - अब हुई है शाम। अब मद्धम सी रोशनी है और बस एक आगे बढ़ती घड़ी मैने... Continue Reading →
Ika Tried
She blamed him on days that it rained, on days that the sun shone bright, on days she couldn't sleep and on days she missed to wake in time to catch the sunrise!
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