Entering a dooris a conscious ceremony for me.Each time - I look.I linger.I remember.Some doors are ornate, some shy.Some barely holding on,like secrets taped together with time.But I never forget a door.They stay,etched in my mindlike scent in old fabric.Doors are my visual memory anchors.My maps of moments.I never walk through casually.My fingers know the... Continue Reading →
Parichay / परिचय
नमस्ते,मैं।किसी की बेटी, किसी की धर्मपत्नी, किसी की बहू।मैं किसी की माँ, किसी की बहन, और किसी की भाभी, मासी, चाची, ताई, बुआ।इन सभी रिश्तों में मुझे अपार खुशी मिलती है।पर क्या मैं सिर्फ यही हूँ?तीस की दहलीज़ पर कदम रखते ही यह सवाल मेरे मन में बार-बार गूंजने लगा।मुझे जीवन में कोई कमी नहीं... Continue Reading →
घर मेरा / ghar mera
कहाँ है घर मेरा?मेरा, मेरे बचपन में है क्या डेरा?चूल्हे की आँच में सेछनती माँ की छवि नेऔर कीकर पर उस पपीहे की पुकार नेमेरे मन की धरा में सब कुछ घेरावहाँ उस पल को घर कहते थे क्या?कहाँ है घर मेरा? स्कूल की उस पहली किताब की जिल्द में?या टिफ़िन से आती पराठे अचार... Continue Reading →
Darwaaze
दीवारों में दरवाज़े हों ना होंझरोखे दुरुस्त होने चाहिएतुम आ जा ना भी सकोहवायें, बौछारें, महक और संगीतआते जाते रहने चाहिएकिरणें, मौसम, चिट्ठी और नज़ारेआते जाते रहने चाहिए झरोखों में पर्दे हों ना होंनज़र भर बाहर झाँकने की गुंजाइश होनी चाहिएपर्दों पर फूल बनें हों ना होंवो हल्के, पारदर्शी होने चाहिएकी जब हवा चले तो... Continue Reading →
शून्य से ही सब बना है
क्या खूबसूरत समाँ हैबेहद ठंड और धुआँ हैना धूप है निकलीना सेक, ना रौशन जहाँ हैना वो अपना सा आलसना मेरे पास आता वो मीठे पानी का कुआँ हैना परिचित रास्ता, ना ठहाकेना ही पुकारता फ़लाँ फ़लाँ हैना साख गिरने का डर, ना जवाबदेहीना ऊँघता हुआ एक भी रुआँ हैलेटे हुए एकटक पंखे को घूरने... Continue Reading →
Amu’s Eyes
Amu was a rather curious child; or so his folks told. I met him when I was 38 and he was 27. He felt fresh like a breeze, uncomplicated, conveniently attached, mostly detached. I wish I could grow up with him, but I was already here - half my life gone, still figuring where I... Continue Reading →
ज़िंदगी आयी / life happened
आते आते धूप के किनारे से थोड़ी आँच के आयी थोड़ी रोशनी ले आयी थोड़ी शराफ़त और तड़का भर शरारत के आयी पेड़ की पत्तियों में छान छान किरणें ले आयी, नमी ले आयी, महक ले आयी प्रेम ले आयी, ना जाने कितने ही रंग के आयी मिट्टी में दौड़ते हुए, गोद में छुपते छुपाते... Continue Reading →
Measurement / माप
It gives you timed meetingsTakes away conversationsIt gives you kgs and poundsTakes away the personIt gives you hours,takes away lives Measurement ruins everythingIt gives you calories,takes away the foodIt gives you bank balance,And a resume,takes away fulfilmentIt gives you steps and pace,Takes away the joy of a run, a swim, a walk Photo by Sora... Continue Reading →
हम यूँही हैं
हर ताले के पीछे कुछ क़ीमती नहीं होता हर चुप के पीछे कुछ गहरायी नहीं होती हर अभाव में ख्वाहिश नहीं होती हर खामोशी में ग़म नहीं होता हर नींद में नशा नहीं होता हर कश में धुआँ नहीं होता हर मैं में स्वार्थ नहीं होता हर तू में इल्ज़ाम नहीं होता हर सिफ़र को भरना नहीं होता हर पल को भरपूर जीना नहीं होता हर बात का मायना नहीं होता बिन मक़सद भी होता है बहुत कुछ यूँही भी होता है बिन मंज़िल भी होता है बहुत कुछ अधूरा भी होता है
तेरे पहलू में
तेरे पहलू में, गहमा गहमि से परे शोर गुल से परे एक नर्म, सरल सा एहसास है परिवार से परे, दोस्तों से परे, सब से परे, खुद से परे, तुझसे भी परे, माँ के दामन जैसा महफ़ूज़ धरती के जैसा अपार तेरी मोहब्बत के जैसा मखमली तेरे पहलू में, एक नर्म, सरल सा एहसास है... Continue Reading →
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