नमस्ते,मैं।किसी की बेटी, किसी की धर्मपत्नी, किसी की बहू।मैं किसी की माँ, किसी की बहन, और किसी की भाभी, मासी, चाची, ताई, बुआ।इन सभी रिश्तों में मुझे अपार खुशी मिलती है।पर क्या मैं सिर्फ यही हूँ?तीस की दहलीज़ पर कदम रखते ही यह सवाल मेरे मन में बार-बार गूंजने लगा।मुझे जीवन में कोई कमी नहीं... Continue Reading →
घर मेरा / ghar mera
कहाँ है घर मेरा?मेरा, मेरे बचपन में है क्या डेरा?चूल्हे की आँच में सेछनती माँ की छवि नेऔर कीकर पर उस पपीहे की पुकार नेमेरे मन की धरा में सब कुछ घेरावहाँ उस पल को घर कहते थे क्या?कहाँ है घर मेरा? स्कूल की उस पहली किताब की जिल्द में?या टिफ़िन से आती पराठे अचार... Continue Reading →
Darwaaze
दीवारों में दरवाज़े हों ना होंझरोखे दुरुस्त होने चाहिएतुम आ जा ना भी सकोहवायें, बौछारें, महक और संगीतआते जाते रहने चाहिएकिरणें, मौसम, चिट्ठी और नज़ारेआते जाते रहने चाहिए झरोखों में पर्दे हों ना होंनज़र भर बाहर झाँकने की गुंजाइश होनी चाहिएपर्दों पर फूल बनें हों ना होंवो हल्के, पारदर्शी होने चाहिएकी जब हवा चले तो... Continue Reading →
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