क्या खूबसूरत समाँ हैबेहद ठंड और धुआँ हैना धूप है निकलीना सेक, ना रौशन जहाँ हैना वो अपना सा आलसना मेरे पास आता वो मीठे पानी का कुआँ हैना परिचित रास्ता, ना ठहाकेना ही पुकारता फ़लाँ फ़लाँ हैना साख गिरने का डर, ना जवाबदेहीना ऊँघता हुआ एक भी रुआँ हैलेटे हुए एकटक पंखे को घूरने... Continue Reading →
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