मैंने जब हाँ कहा था, तुम मुझसे कद में छोटी थी, भोली थी, सुन्दर थी, चुप चुप सी थी। पूछने पर झट से हाँ कहा था खुद को आईने में देख के बड़ा इतराया था उस रोज़ मेरी बीवी मेरा घर जगमग करेगी ब्याह के जब तुम्हें लाया तब ख़याल आया कि अपने घर को... Continue Reading →
चंद सिक्के | Chand Sikke
चंद सिक्के चंद सिक्कों को गिन गिन खनकते चमकते, आज मेरे कल शायद तेरे पुराने नए छोटे बड़े सब सिक्कों को फिर से गिन एक पुराने बटुए की उधड़ी जेब में संभाल कर, मैं हर सुबह घर से निकलता बाल संवार, चेहरा निखार थोड़ी शरारत से माँ को हंसा कर खिलखिलाहट घर में फैला कर... Continue Reading →
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