घर लौटते हुए आज गर्मी बहुत थी शाम के 7:30 बजे भी आग बरस रही थी मैंने कार का AC बढ़ा दिया और पसीने पोंछते हुए दुनिया कोसने लगी कितनी कारें, कितने कम पेड़, सलेटी आसमान, कोई तारा नहीं बिन चमक का चाँद, जैसे कोई गोला बनाके उसमे रंग भरना भूल गया हो क्यों रहते... Continue Reading →
आधा तेरा आधा मेरा
उसने पूछा फूल चाहिए? मैंने गुलाब मांग लिया उसने पूछा खुशबु? मैंने चन्दन को छू दिया उसने उगता सूरज दिखाया मैंने पर्दा कर दिया ढलता चाँद दिखाया मैंने आँखों को मूँद लिया उसने पूछा साथी चाहिए? मैंने अपना बोझ थमा दिया ख़ुशी चाहिए? मैंने कहा तुम रहने दो - नहीं दे पाओगे ज़िद्दी था बोला... Continue Reading →
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