हर काल में है काले का किरदार हर सुबह पर शाम का है अधिकार जुबां से जुबां तक चलती महाभारत में काले हाथी की हुंकार तक सांवल कृष्ण के आकार तक हारे हुए शवों पर स्याह काग की पुकार तक और फिर अनंत बद्र की बौछार से ठंडी हुई राख तक हर काल में है... Continue Reading →
जड़ सी जमी
आंसूं में व्यर्थ क्यों करूँ, जब हर जान पानी मांगती फिर बढ़ूंगी फिर फलूंगी जब तक मेरी जड़ है मैं नहीं मरूंगी वृक्ष नहीं वृक्षा कहते हैं मुझे कभी छाँव सुहावनी, कभी चिता की अग्नि बनी मैं जड़ सी जमी
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