ये सब मेरी माँ ने बनाया है ये सुबह, ये रात, इंद्रधनुष के ये रंग सात सूरज की सभी किरणे मोर के नाच में निशात ये सब मुझे मेरी माँ ने सिखाया है कर्म है सबसे बड़ा जाप चलते रहो निरंतर कर्मठ चुपचाप सेवा में है प्रेम, प्रेम में सेवा मुस्कराहट में है प्रताप ये... Continue Reading →
अब हुई है शाम
अब हुई है शाम क्या हम थे वहां या सिर्फ सपना ही था, कुछ पर्दे थे, कुछ हुआ खुले आम। क्या तेरी कही क्या मेरी सुनी, शब्द ही तो थे, हुई अपनी ही ज़ुबाँ बेईमान। सब बिखर गया - अब हुई है शाम। अब मद्धम सी रोशनी है और बस एक आगे बढ़ती घड़ी मैने... Continue Reading →
Ika Tried
She blamed him on days that it rained, on days that the sun shone bright, on days she couldn't sleep and on days she missed to wake in time to catch the sunrise!
मेरी जीविशा
मैं धरा से बनी हूँ अब्र में रमी हूँ सूती सिलवट से कभी तो कभी रेशम से सजी हूँ कहीं आकाश सी मुक्त हूँ कहीं रिश्तों में बंधी हूँ दिन भर थिरकती धड़कन सी कितनी रातों जगी हूँ राधा बन प्रेम की माला बनी कभी कभी सीता सा त्याग दे चुकी हूँ कभी झरना हूँ... Continue Reading →
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